प्रमुख बिंदु-
वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर जाने वाले वैकल्पिक मार्ग को बेहतर बनाने के लिए दालमंडी (Dalmandi) इलाके में सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। यहां 187 मकानों और दुकानों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें तोड़कर सड़क को चौड़ा किया जाएगा। मालिकों को मुआवजे के लिए जरूरी कागजात जमा करने का अल्टीमेटम दिया गया है, लेकिन कई लोग दस्तावेजों की जानकारी न होने से परेशान हैं। प्रशासन का कहना है कि सर्किल रेट से दोगुना मुआवजा दिया जाएगा, कुल 191 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जाएगी।
परियोजना का पूरा खाका
दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना करीब 600 मीटर लंबी सड़क पर फैली हुई है, जिसकी लागत लगभग 225 करोड़ रुपये आंकी गई है। सड़क के बीच से दोनों ओर 8.7 मीटर चौड़ीकरण किया जाएगा, जिसमें फुटपाथ भी बनाए जाएंगे। प्रशासन के मुताबिक, यह काम मिशन मोड में पूरा किया जाएगा। हाल ही में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद पीडब्ल्यूडी ने तेजी दिखाई है। पहले से ही 220 करोड़ से ज्यादा का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, और अब फंड जारी होने के साथ काम शुरू हो चुका है।

एडीएम (एफआर) ने बताया कि धार्मिक स्थलों समेत सभी प्रभावित संपत्तियों पर कार्रवाई होगी, लेकिन आपसी सहमति से। सड़क चौड़ी होने से नई सड़क से चौक थाने तक का रास्ता सुगम हो जाएगा, जो काशी विश्वनाथ मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बड़ा राहत होगी। परियोजना के तहत नाली, डक्ट और बिजली के तारों को शिफ्ट करने का काम भी शामिल है।
उपरोक्त प्लान के अनुसार कुछ ऐसा दिखेगा मार्ग


मुआवजे के लिए जरूरी दस्तावेज क्या-क्या
मुआवजा तय करने के लिए मकान मालिकों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा करने होंगे। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, सबसे पहले मकान की रजिस्ट्री का मूल कागज लाना जरूरी है। इसमें सभी वैध हस्ताक्षर और स्टांप होने चाहिए। अगर रजिस्ट्री नहीं है, तो नगर निगम का पीला कार्ड मान्य होगा, लेकिन उसकी मूल कॉपी और फोटोकॉपी दोनों जमा करनी होंगी। एडीएम सिटी ने स्पष्ट किया कि यदि खतौनी या पीला कार्ड उपलब्ध नहीं है, तो बिजली का हालिया बिल, हाउस टैक्स या वाटर टैक्स की रसीदें भी स्वीकार की जाएंगी।
इनके आधार पर अधिकारियों द्वारा विचार किया जाएगा। इसके अलावा, मालिक का आधार कार्ड और पैन कार्ड की कॉपी अनिवार्य है, क्योंकि मुआवजा उसी नाम से जारी होगा। बैंक पासबुक की फोटोकॉपी और दो पासपोर्ट साइज फोटो भी जमा करनी होंगी, ताकि राशि सीधे खाते में ट्रांसफर हो सके। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अधूरे दस्तावेजों पर मुआवजा प्रक्रिया रुक सकती है। कई मालिक पहले से ही कैंप पहुंचकर पूछताछ कर रहे हैं, और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

मुआवजे की राशि
प्रशासन ने साफ किया कि मुआवजा सर्किल रेट से दोगुना दिया जाएगा, जो मालिकों के लिए राहत की बात है। कुल 187 चिह्नित संपत्तियों के लिए 191 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पीडब्ल्यूडी के अनुसार, दस्तावेजों की जांच के बाद मुआवजा राशि तय की जाएगी। अगर दस्तावेज वैध पाए गए, तो जल्द ही भुगतान शुरू हो जाएगा।
एडीएम वर्मा ने कहा कि वैकल्पिक दस्तावेजों पर भी विचार किया जाएगा, लेकिन मूल प्रमाण-पत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। मुआवजा बैंक खाते में ही ट्रांसफर होगा, इसलिए पासबुक डिटेल्स सही होना जरूरी है। कुछ मामलों में धार्मिक स्थलों को विशेष छूट मिल सकती है, लेकिन कुल मिलाकर सभी को समान नियमों का पालन करना होगा। प्रशासन का दावा है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी होगी, और किसी भी शिकायत के लिए हेल्पलाइन उपलब्ध कराई जाएगी।

व्यापारियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय व्यापारियों में इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ का कहना है कि सड़क चौड़ी होने से बाजार में ट्रैफिक सुगम होगा, जो कारोबार के लिए फायदेमंद साबित होगा। लेकिन कई दुकानदार चिंतित हैं कि अचानक तोड़फोड़ से उनका रोजगार प्रभावित होगा। एक व्यापारी ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद रातों की नींद हराम हो गई है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मुआवजा मिलने के बाद ही बुलडोजर चलेगा, लेकिन समयसीमा कम होने से लोग जल्दबाजी में हैं। पीडब्ल्यूडी ने कहा कि अगर दस्तावेज समय पर जमा नहीं हुए, तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है। आगे चलकर यह परियोजना वाराणसी के अन्य इलाकों में भी विस्तारित हो सकती है।
राणा अंशुमान सिंह यूनिफाइड भारत के एक उत्साही पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और प्रभावी ख़बरों के सन्दर्भ में जाने जाना पसंद करते हैं। वह सामाजिक मुद्दों, धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण, महिलाओं के अधिकारों और राजनीति पर गहन शोध करना पसंद करते हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ हिंदी-उर्दू में कविताएँ और ग़ज़लें लिखने के शौकीन राणा भारतीय संस्कृति और सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
