प्रमुख बिंदु-
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 21 अगस्त 2025 को उस समय हलचल मच गई, जब SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के चेयरपर्सन तुहिन कांता पांडे ने इक्विटी डेरिवेटिव्स के कार्यकाल और परिपक्वता को बढ़ाने की योजना की घोषणा की। इस खबर के बाद BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और CDSL (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड) के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।
BSE का शेयर मूल्य लगभग 6% गिरकर 2,372.40 रुपये प्रति शेयर पर आ गया, जबकि CDSL का शेयर 1% से अधिक गिरकर 1,575.90 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इसके साथ ही, सेबी ने एक प्री-IPO ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म शुरू करने की योजना का भी जिक्र किया, जिसका उद्देश्य निवेशकों के लिए पारदर्शिता बढ़ाना और पूंजी बाजार को मजबूत करना है।
सेबी की डेरिवेटिव्स के कार्यकाल में बदलाव नीति
सेबी के चेयरपर्सन तुहिन कांता पांडे ने मुंबई में फिक्की (FICCI) कैपिटल मार्केट कॉन्फ्रेंस 2025 में बोलते हुए कहा कि सेबी इक्विटी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की अवधि और परिपक्वता को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य सट्टेबाजी को कम करना और दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करना है। सेबी जल्द ही इस प्रस्ताव पर एक परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) जारी करेगा, जिसमें हितधारकों से राय ली जाएगी। पांडे ने स्पष्ट किया कि साप्ताहिक समाप्ति (weekly expiry) को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे और अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में काम होगा।
पिछले कुछ वर्षों में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में रिटेल निवेशकों की भागीदारी में भारी वृद्धि हुई है, जिसके कारण सेबी ने पहले ही कॉन्ट्रैक्ट्स की समाप्ति की संख्या को सीमित किया और लॉट साइज बढ़ाया था। पांडे ने कहा कि यह कदम जोखिमों को कम करने और बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि डेरिवेटिव्स की अवधि बढ़ाने से BSE जैसे स्टॉक एक्सचेंजों की ट्रेडिंग मात्रा में 50-60% तक की कमी आ सकती है, जो उनकी आय को प्रभावित करेगा।

BSE और CDSL पर असर
सेबी की इस घोषणा के बाद पूंजी बाजार से जुड़े स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखी गई। BSE के शेयरों में लगभग 6% की गिरावट आई, जो गुरुवार दोपहर तक 2,372.40 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। इसी तरह, CDSL के शेयर 1% से अधिक गिरकर 1,575.90 रुपये पर पहुंच गए। इसके अलावा, एंजल वन और मोतीलाल ओसवाल जैसे ब्रोकरेज फर्मों के शेयरों में भी 2-7% की गिरावट दर्ज की गई।
विश्लेषकों का कहना है कि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग BSE की आय का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 44%) है। वित्त वर्ष 2025 में BSE की कुल आय 3,236 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 1,415 करोड़ रुपये डेरिवेटिव्स से आए। इसलिए, डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की अवधि बढ़ाने से BSE और अन्य ब्रोकरेज फर्मों की आय पर बड़ा असर पड़ सकता है।

प्री-IPO ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म: नया कदम
सेबी ने फिक्की कॉन्फ्रेंस में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें प्री-IPO ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म शुरू करने की बात कही गई। पांडे ने बताया कि IPO बाजार में तेजी के बावजूद, निवेशकों को प्री-लिस्टिंग जानकारी अक्सर अपर्याप्त मिलती है। इस कमी को दूर करने के लिए सेबी एक रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म शुरू करने की योजना बना रहा है, जहां कंपनियां आवश्यक खुलासे (disclosures) के साथ ट्रेड कर सकेंगी।
यह पायलट प्रोजेक्ट पूंजी बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और स्टार्टअप्स व ग्रोथ-स्टेज कंपनियों में निवेशकों की रुचि को और मजबूत करने में मदद करेगा। पांडे ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म फंडरेजिंग, डिस्क्लोजर और निवेशक ऑनबोर्डिंग में अनावश्यक प्रक्रियाओं को हटाएगा और नए उत्पादों व एसेट क्लास को बढ़ावा देगा।

बाजार और निवेशकों पर प्रभाव
सेबी के इन प्रस्तावों से शेयर बाजार में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक ओर डेरिवेटिव्स की अवधि बढ़ाने से सट्टेबाजी कम हो सकती है, वहीं दूसरी ओर यह BSE और ब्रोकरेज फर्मों की आय को प्रभावित कर सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि साप्ताहिक समाप्ति वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में सट्टेबाजी की प्रवृत्ति अधिक होती है, जिसे कम करने के लिए सेबी यह कदम उठा रहा है।
प्री-IPO प्लेटफॉर्म की घोषणा को निवेशकों ने सकारात्मक रूप से लिया है, क्योंकि यह स्टार्टअप्स और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश के अवसर बढ़ाएगा। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सेबी इसे कितनी प्रभावी ढंग से लागू करता है।

सेबी की नई नीतियां और प्री-IPO ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की योजना भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम न केवल डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि निवेशकों को गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश का नया अवसर भी प्रदान करेगा। हालांकि, BSE और CDSL जैसे संस्थानों को अल्पकालिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सेबी के परामर्श पत्र का इंतजार करें और बाजार की गतिविधियों पर नजर रखें।
राणा अंशुमान सिंह यूनिफाइड भारत के एक उत्साही पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और प्रभावी ख़बरों के सन्दर्भ में जाने जाना पसंद करते हैं। वह सामाजिक मुद्दों, धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण, महिलाओं के अधिकारों और राजनीति पर गहन शोध करना पसंद करते हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ हिंदी-उर्दू में कविताएँ और ग़ज़लें लिखने के शौकीन राणा भारतीय संस्कृति और सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
