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नई दिल्ली: भोजपुरी सिनेमा और संगीत की दुनिया के चहेते सितारे पवन सिंह (Pawan Singh) ने राजनीति में कदम रखते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है। बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले यह कदम उठाने वाले पवन ने साफ कर दिया है कि वे किसी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि पार्टी के एक सच्चे सिपाही के रूप में काम करेंगे। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से उनकी मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी थी।
पवन सिंह का भाजपा से गठजोड़
सितंबर के आखिर में दिल्ली पहुंचे पवन सिंह ने सबसे पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की। भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा के साथ यह बैठक करीब आधे घंटे चली। कुशवाहा ने पवन को गर्मजोशी से गले लगाया और उनका राजनीतिक सफर के लिए आशीर्वाद दिया। इसके ठीक बाद तावड़े ने घोषणा की कि पवन सिंह अब भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में एनडीए को मजबूत बनाने का काम करेंगे।

इससे एक दिन पहले, 29 सितंबर की रात को ही विनोद तावड़े और ऋतुराज सिन्हा ने कुशवाहा से पवन के बारे में विस्तार से चर्चा की थी। उनकी सहमति मिलते ही अगली सुबह पवन को लेकर वे उनके आवास पहुंचे। मुलाकात के बाद पवन ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की, जो लगभग 20 मिनट तक चली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बिहार के भोजपुर क्षेत्र में भाजपा की पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है, जहां पवन की फैन फॉलोइंग जबरदस्त है।

भोजपुरी स्टार से राजनीतिक सिपाही
पवन सिंह का जन्म 5 जनवरी 1986 को बिहार के आरा जिले में हुआ। मात्र 11 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला एल्बम रिलीज किया, लेकिन 2008 में आए गाने ‘लॉलीपॉप लागेलू’ ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। इसके बाद ‘कमरिया हिला रही है’ जैसे हिट नंबर्स ने भोजपुरी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई। फिल्मों की बात करें तो ‘प्रतिज्ञा’, ‘क्रैक फाइटर’, ‘धड़कन’ और ‘हर हर गंगे’ जैसी ब्लॉकबस्टर ने उन्हें भोजपुरी सिनेमा का ‘पावरस्टार’ बना दिया।
राजनीति में उनका पहला कदम 2024 के लोकसभा चुनाव में आरा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में था, जहां वे हार गए। लेकिन अब भाजपा में शामिल होकर वे एनडीए के प्रचारक के रूप में सक्रिय रहेंगे। हाल ही में बिजनेस टायकून अशनीर ग्रोवर के रियलिटी शो ‘राइज एंड फॉल’ से बाहर आने के दौरान पवन ने कहा था, “मेरी जनता ही मेरा भगवान है। चुनाव के समय मेरा फर्ज है कि मैं उनके बीच रहूं।” यह बयान उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

चुनावी अटकलों पर विराम: ‘सिपाही’ बनकर रहेंगे
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी जोरों पर है और पवन सिंह के भाजपा में शामिल होने से अटकलें तेज हो गई थीं कि वे आरा या बरहरा सीट से टिकट मांग सकते हैं। लेकिन 11 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पवन ने इन अफवाहों का खात्मा कर दिया। उन्होंने लिखा, “मैं पवन सिंह अपने भोजपुरीया समाज से बताना चाहता हूँ कि मैं बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ज्वाइन नहीं किया था और नाहीं मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना है… मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूँ और रहूँगा।”

इसके साथ ही उन्होंने अमित शाह के साथ अपनी फोटो शेयर की, जो उनकी वफादारी का प्रतीक बनी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पवन का यह फैसला भाजपा को भोजपुरी समुदाय के बीच मजबूत आधार देगा, बिना किसी प्रत्यक्ष टकराव के। हालांकि, उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने हाल ही में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर से मुलाकात की, जो उनके वैवाहिक विवादों से जुड़ी लगती है। ज्योति ने कहा कि वे टिकट की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि न्याय की अपील कर रही हैं।
पवन सिंह का भाजपा में प्रवेश बिहार की राजनीति में एक नया रंग भर सकता है। क्या वे प्रचार अभियान में स्टेज पर उतरेंगे या पीछे से समर्थन देंगे? आने वाले दिनों में यह साफ होगा। फिलहाल, भोजपुरी फैंस के लिए उनका यह राजनीतिक अवतार उत्साहजनक है।
राणा अंशुमान सिंह यूनिफाइड भारत के एक उत्साही पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और प्रभावी ख़बरों के सन्दर्भ में जाने जाना पसंद करते हैं। वह सामाजिक मुद्दों, धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण, महिलाओं के अधिकारों और राजनीति पर गहन शोध करना पसंद करते हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ हिंदी-उर्दू में कविताएँ और ग़ज़लें लिखने के शौकीन राणा भारतीय संस्कृति और सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
