प्रमुख बिंदु-
लखनऊ, 9 अक्टूबर 2025: नौ साल बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने कांशीराम स्मारक (Lucknow) पर ऐतिहासिक रैली को संबोधित किया। कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि पर लाखों समर्थकों की उपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। मायावती ने पुराने जोश के साथ मंच पर डटे रहते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखे प्रहार किए, योगी सरकार की सराहना की और भतीजे आकाश आनंद को उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया। यह रैली बसपा के पुनरुद्धार का संकेत दे रही है, जहां पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने का ऐलान किया।
भीड़ का सैलाब: पांच राज्यों से पहुंचे लाखों कार्यकर्ता
कांशीराम स्मारक स्थल पर सुबह से ही नीले झंडों का समंदर उमड़ पड़ा। बिहार, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से आए समर्थकों ने मायावती और आकाश आनंद के नारों से वातावरण गर्म कर दिया। अनुमान है कि डेढ़ लाख क्षमता वाले स्मारक के अलावा आसपास की सड़कों पर भी हजारों लोग जमा हो गए। महिलाएं और बच्चे भी खासी संख्या में दिखे, जो बसपा के सामाजिक आधार को दर्शाता है।
मायावती ने कहा, “यह भीड़ दिहाड़ी पर नहीं, बल्कि अपने खून-पसीने से आई है।” सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के तहत 5 हजार पुलिसकर्मी और 2 हजार वॉलंटियर तैनात थे। 10 किलोमीटर लंबा जाम लगा, लेकिन उत्साह कम न हुआ। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह रैली बसपा की संगठनात्मक ताकत का प्रमाण है, जो 2012 के बाद से लगातार गिरावट का शिकार रही। 2022 विधानसभा में सिर्फ एक सीट और 2024 लोकसभा में खाता बंद होने के बाद यह आयोजन संजीवनी की तरह है।

सपा पर सीधी चोट, योगी सरकार को आभार
मायावती का संबोधन करीब एक घंटे चला, जिसमें सपा सबसे ज्यादा निशाने पर रहीं। उन्होंने अखिलेश यादव पर कटाक्ष किया, “सत्ता में रहते सपा को PDA या बहुजन हित याद नहीं आता, लेकिन विपक्ष में बन जाते हैं सामाजिक न्याय के ठेकेदार। जनता उनके दोगलेपन को समझ चुकी है।” कांशीराम स्मारक और अंबेडकर पार्क के रखरखाव पर सपा सरकार की आलोचना करते हुए मायावती ने कहा, “सपा ने टिकटों का पैसा दबा दिया था, लेकिन योगी सरकार ने मेरी अपील पर मरम्मत कराई। मैं वर्तमान सरकार के आभारी हूं।”
यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि बसपा ने कभी भाजपा की इतनी खुली तारीफ नहीं की। साथ ही, कांग्रेस को भी जातिवादी करार दिया। आजम खान के बसपा में शामिल होने की अफवाहों पर मायावती ने कहा, “मैं छिपकर किसी से नहीं मिलती, सब कुछ खुला होता है।”
चंद्रशेखर पर निशाना, ‘बिकाऊ’ तत्वों से सावधान
रैली में मायावती ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर बिना नाम लिए निशाना साधा। उन्होंने कहा, “हमारी कमजोरी के लिए षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। स्वार्थी और बिकाऊ लोग नए संगठन बनाकर वोट बांट रहे हैं। अब ये अपने उम्मीदवारों को जितवाने के लिए दलित वोट ट्रांसफर करवा रहे हैं।” यह बयान आजाद की आजादी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है, जो दलित वोट बैंक पर नजर रखे हुए है। मायावती ने कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की हिदायत दी, ताकि बहुजन समाज का एकजुट रहना सुनिश्चित हो। पर्यवेक्षक इसे बसपा की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जहां छोटे दलों को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है।
आकाश आनंद को उत्तराधिकारी का संकेत
मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को मंच पर प्रमुख स्थान दिया और कहा, “आकाश पार्टी मूवमेंट से जुड़ चुके हैं। कांशीराम जी ने मुझे आगे बढ़ाया, वैसे ही मैं आकाश को आगे बढ़ाऊंगी। आप सभी उनका साथ देंगे।” यह संकेत साफ है कि आकाश ही भविष्य के नेता हैं। उन्होंने बसपा के पांच वरिष्ठ नेताओं, सतीश चंद्र मिश्रा, उमाशंकर सिंह, विश्वनाथ पाल, जमील अख्तर और उनके बेटों की तारीफ की। पहली बार मंच पर अन्य नेताओं को जगह मिली, जिसमें मुस्लिम, दलित, ओबीसी और सामान्य वर्ग के चेहरे शामिल थे। यह बदलाव बसपा की समावेशी छवि को मजबूत करने का प्रयास लगता है।

2027 का लक्ष्य: ज्यादा सक्रियता, कोई गठबंधन नहीं
रैली के अंत में मायावती ने खुद को ज्यादा सक्रिय रहने का वादा किया। “अब मैं आपमें ज्यादा समय दूंगी, ऐसे कार्यक्रम बढ़ेंगे। 2027 में बसपा पांचवीं बार सत्ता में आएगी। सपा, भाजपा, कांग्रेस के षड्यंत्रों से सावधान रहें।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई गठबंधन नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह रैली बसपा को नई ऊर्जा देगी, लेकिन सपा ने पलटवार की तैयारी शुरू कर दी है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसा, “दोगलेपन का आईना दिखाने वालों को खुद आईना देखना चाहिए।” बसपा समर्थक उत्साहित हैं, लेकिन आलोचक इसे भाजपा के करीब जाने का संकेत बता रहे हैं। कुल मिलाकर, यह रैली उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।
राणा अंशुमान सिंह यूनिफाइड भारत के एक उत्साही पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और प्रभावी ख़बरों के सन्दर्भ में जाने जाना पसंद करते हैं। वह सामाजिक मुद्दों, धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण, महिलाओं के अधिकारों और राजनीति पर गहन शोध करना पसंद करते हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ हिंदी-उर्दू में कविताएँ और ग़ज़लें लिखने के शौकीन राणा भारतीय संस्कृति और सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
