प्रमुख बिंदु-
जबलपुर: लोकप्रिय भक्ति और लोक गायिका मैथिली ठाकुर (Maithili Thakur) की बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उतरने की अटकलें तेज हो रही हैं। जबलपुर के नर्मदा महोत्सव में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने इन चर्चाओं पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी। मैथिली ने कहा कि वे अपने जन्मस्थान की मिट्टी से जुड़ी हुई हैं और अगर मौका मिला तो बिहार की सेवा के लिए तैयार हैं। यह बयान बिहार की सियासत में नया मोड़ ला सकता है, जहां बीजेपी जैसे दल सांस्कृतिक हस्तियों को मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
मैथिली के राजनीतिक सफर की लॉन्चिंग
मैथिली ठाकुर, जो मात्र 11 साल की उम्र में गायन की दुनिया में धमाल मचा चुकी हैं, अब राजनीति की दहलीज पर कदम रखने को बेताब नजर आ रही हैं। हाल ही में उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बीजेपी नेता विनोद तावड़े से मुलाकात की, जिसके बाद बीजेपी टिकट पर उनकी उम्मीदवारी की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं।
जबलपुर में उन्होंने कहा, “मैं इन खबरों और तस्वीरों को देखकर बेहद उत्साहित हूं। पिछले चार दिनों से मेरे नाम पर चर्चा हो रही है, लेकिन आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। उसके बाद ही मैं विस्तार से बता पाऊंगी।” उनके पिता ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि पार्टी का फैसला मान्य होगा और वे बेटी का पूरा साथ देंगे। मैथिली का यह कदम पवन सिंह जैसे भोजपुरी सितारों की तर्ज पर बिहार की सियासत को और रंगीन बना सकता है।
जड़ों से गहरा लगाव
मैथिली का बचपन बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी इलाके में बीता, जहां वे दादा-दादी के साथ रहती थीं। उस दौर में आर्थिक तंगी के कारण कई परिवारों को मजबूरी में बाहर पलायन करना पड़ता था। मैथिली ने भावुक होकर कहा, “मेरा बचपन गांव में ही गुजरा। दादा-दादी से मेरा गहरा जुड़ाव रहा। अब समय आ गया है कि मैं वापस लौटूं। मन में प्रबल इच्छा है कि अपने गांव की धरती पर कदम रखूं।” वे संभवत: बेनीपट्टी या अलीनगर सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता रही हैं, जो उनकी जन्मभूमि से सटे इलाके हैं। यह भावना बिहार के उन युवाओं को छू सकती है, जो प्रवासी जीवन से त्रस्त हैं और घर लौटने का सपना देखते हैं।

बदलाव की ललक: राजनीति नहीं, सेवा का संकल्प
मैथिली ने साफ कर दिया कि वे राजनीति के लिए नहीं, बल्कि बदलाव लाने के लिए लौट रही हैं। “मैं कोई खेल खेलने या सियासत करने नहीं आ रही। मुझे बस इतनी ताकत चाहिए, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकूं। अपने क्षेत्र में कुछ नया करना चाहती हूं,” उन्होंने जोर देकर कहा। वे बिहार के विकास पर खास जोर दे रही हैं, खासकर शिक्षा और युवाओं के लिए। “मेरा स्कूल जीवन गांव में बहुत कठिन रहा। अब ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि लोग पलायन न करें और घर लौट सकें।”
नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए मैथिली बोलीं, “उन्होंने बिहार को गड्ढों से निकाला है। अब अगले पांच साल बहुत महत्वपूर्ण हैं। युवा नई सोच लाएंगे, जिससे असली बदलाव आएगा।” यह बयान बिहार के ग्रामीण इलाकों में उनकी छवि को मजबूत कर सकता है।

बिहार सियासत में सितारों की होड़
बिहार चुनाव 2025 में मैथिली की संभावित एंट्री एनडीए के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकती है। बीजेपी पहले ही पवन सिंह और ऋतेश पांडे जैसे नामों को जोड़ चुकी है, जबकि महागठबंधन भी सांस्कृतिक हस्तियों पर नजर रखे हुए है। खेसारी लाल यादव जैसे सितारों की अफवाहें भी जोर पकड़ रही हैं।
मैथिली की लोकप्रियता, जो पीएम मोदी तक की प्रशंसा पा चुकी है, उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव बिहार के लिए युवा ऊर्जा और विकास का मंच बनेगा। मैथिली की प्रतीक्षित घोषणा पर सभी की नजरें टिकी हैं, जो बिहार की राजनीति को नया आयाम देगी।
राणा अंशुमान सिंह यूनिफाइड भारत के एक उत्साही पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और प्रभावी ख़बरों के सन्दर्भ में जाने जाना पसंद करते हैं। वह सामाजिक मुद्दों, धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण, महिलाओं के अधिकारों और राजनीति पर गहन शोध करना पसंद करते हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ हिंदी-उर्दू में कविताएँ और ग़ज़लें लिखने के शौकीन राणा भारतीय संस्कृति और सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
