प्रमुख बिंदु-
Achyut Potdar Passes Away: हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अच्युत पोतदार अब हमारे बीच नहीं रहे। 91 साल की उम्र में उन्होंने 18 अगस्त 2025 को मुंबई के ठाणे स्थित जुपिटर अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों को गहरे शोक में डुबो दिया है। नया ज़माना अच्युत पोतदार को आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 3 Idiots में प्रोफेसर की भूमिका और उनके मशहूर डायलॉग “अरे कहना क्या चाहते हो?” वाले वायरल मीम से जानता है। चार दशकों से अधिक के अपने शानदार करियर में उन्होंने 125 से ज्यादा फिल्मों और कई टीवी शोज में अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया।
अच्युत पोतदार का शानदार अभिनय सफर
अच्युत पोतदार का जन्म 22 अगस्त 1934 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 44 साल की उम्र में की थी, लेकिन उनकी प्रतिभा ने उन्हें जल्द ही हिंदी और मराठी सिनेमा में एक खास मुकाम दिलाया। 3 Idiots (2009) में उनके द्वारा निभाया गया सख्त प्रोफेसर का किरदार भले ही छोटा था, लेकिन उनका डायलॉग “अरे कहना क्या चाहते हो?” आज भी सोशल मीडिया पर मीम्स के रूप में वायरल है। इस डायलॉग ने उन्हें नई पीढ़ी के बीच भी लोकप्रिय बना दिया।
उन्होंने आक्रोश, अर्ध सत्य, तेजाब, परिंदा, रंगीला, लगे रहो मुन्ना भाई, परिणीता, दबंग 2 और वेंटिलेटर जैसी 125 से अधिक हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया। इसके अलावा, उन्होंने वागले की दुनिया, माझा होशिल ना, मिसेज तेंदुलकर और भारत की खोज जैसे लोकप्रिय टीवी शोज में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। चाहे छोटा रोल हो या बड़ा, अच्युत जी हर किरदार में अपनी छाप छोड़ने में माहिर थे। उनकी सादगी, मुस्कान और हर किरदार में झलकती सच्चाई ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

सेना से सिनेमा तक का प्रेरणादायक जीवन
अच्युत पोतदार का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले, उन्होंने मध्य प्रदेश के रीवा में प्रोफेसर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे भारतीय सेना में शामिल हुए और 1967 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। सेना के बाद, उन्होंने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में 25 साल तक बतौर एग्जीक्यूटिव काम किया और 1992 में रिटायर हुए। इस दौरान, थिएटर के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने सत्यदेव दुबे, विजया मेहता और सुलभा देशपांडे जैसे दिग्गजों के साथ रंगमंच पर काम किया, जिसने उनकी अभिनय यात्रा की नींव रखी।
44 साल की उम्र में, उन्होंने 1980 में फिल्म आक्रोश से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी और स्मिता पाटिल जैसे सितारे थे। इसके बाद, उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और चार दशकों तक अपनी बहुमुखी प्रतिभा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें हिंदी और मराठी सिनेमा में एक सम्मानित नाम बनाया।

फिल्म इंडस्ट्री और प्रशंसकों में शोक की लहर
18 अगस्त 2025 को अच्युत पोतदार को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण ठाणे के जुपिटर अस्पताल में भर्ती किया गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, वे उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनकी बेटी अनुराधा पारसकर ने उनके निधन की पुष्टि की। 19 अगस्त को ठाणे में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन की खबर फैलते ही, सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और सह-कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया। मराठी टीवी चैनल स्टार प्रवाह ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर उन्हें याद करते हुए एक भावुक पोस्ट साझा किया।

सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने उनके डायलॉग्स और किरदारों को याद करते हुए लिखा, “अच्युत जी का जाना सिनेमा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका ‘कहना क्या चाहते हो’ हमेशा हमें हंसाता रहेगा।” कई लोगों ने उनकी सादगी और समर्पण को सलाम किया। उनके सह-कलाकारों ने उन्हें एक विनम्र और प्रेरणादायक कलाकार के रूप में याद किया, जिनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
राणा अंशुमान सिंह यूनिफाइड भारत के एक उत्साही पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और प्रभावी ख़बरों के सन्दर्भ में जाने जाना पसंद करते हैं। वह सामाजिक मुद्दों, धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण, महिलाओं के अधिकारों और राजनीति पर गहन शोध करना पसंद करते हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ हिंदी-उर्दू में कविताएँ और ग़ज़लें लिखने के शौकीन राणा भारतीय संस्कृति और सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
