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Jaunpur: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के जिला महिला अस्पताल में एक मुस्लिम महिला के साथ कथित भेदभावपूर्ण व्यवहार का मामला सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। चंदवक थाना क्षेत्र के बीरी बारी गांव निवासी 27 वर्षीय शमा परवीन (पत्नी अरमान शाह) ने आरोप लगाया है कि प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही और धार्मिक भेदभाव के कारण इलाज न मिलने से उन्हें भारी कष्ट झेलना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया और मामले की गहन जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
दर्द से तड़पती महिला को भेदभाव का सामना
बीते मंगलवार रात को शमा परवीन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। घबराए परिजनों ने तुरंत उन्हें जौनपुर के जिला महिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक कई घंटों तक मरीज को देखने नहीं आईं। इस दौरान शमा दर्द से कराहती रहीं और बेड पर तड़पती रहीं। आखिरकार जब डॉक्टर पहुंचीं, तो उन्होंने इलाज करने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने शमा के धर्म पर टिप्पणी करते हुए कहा, “तुम मुसलमान हो, हम इलाज नहीं करेंगे।” यह कथित बयान न केवल मरीज और उसके परिवार को सदमे में डाल गया, बल्कि पूरे अस्पताल में सनसनी फैला दी।

शमा परवीन ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि मैं दर्द से तड़प रही थी, लेकिन डॉक्टर ने मेरे धर्म को देखकर इलाज से मना कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद भी कोई चिकित्सक सामान्य डिलीवरी के लिए तैयार नहीं हुआ। मुझे और मेरे परिवार को डराया-धमकाया गया। उनके पति अरमान शाह ने कहा कि हमने अस्पताल से उम्मीद की थी कि यहां तुरंत इलाज मिलेगा, लेकिन इसके बजाय हमें अपमानित महसूस हुआ। धर्म के आधार पर इलाज न करना इंसानियत के खिलाफ है। आक्रोशित परिजनों ने मीडिया से बातचीत में गहरा दुख जताया और कहा कि ऐसी घटना निंदनीय है, जो सामाजिक सौहार्द को चोट पहुंचाती है।

प्रशासन ने दिया जांच और कार्रवाई का आश्वासन
घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिलते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. लक्ष्मी सिंह ने इसे “निंदनीय और अविश्वसनीय” बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में किसी महिला डॉक्टर द्वारा ऐसा व्यवहार करना शर्मनाक है। डॉक्टरों का कर्तव्य इंसानियत के नाते इलाज करना है, न कि जाति या धर्म देखकर। डॉ. सिंह ने तत्काल जांच समिति गठित करने के आदेश दिए और स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने पर शासन को सख्त कार्रवाई के लिए सिफारिश की जाएगी।
जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. महेंद्र गुप्ता ने भी जांच शुरू कर दी है। हालांकि, मीडिया से बातचीत करने से उन्होंने इनकार कर दिया, लेकिन आधिकारिक बयान में कहा गया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम स्तर पर निगरानी के निर्देश जारी किए हैं।
सामाजिक और चिकित्सा नैतिकता पर सवाल
यह घटना न केवल शमा परवीन के परिवार के लिए दर्दनाक है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। अस्पतालों को जीवन रक्षा का केंद्र माना जाता है, जहां मरीज का धर्म, जाति या आर्थिक स्थिति कोई मायने नहीं रखती। लेकिन इस कथित भेदभाव ने चिकित्सा नैतिकता और सामाजिक सद्भाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जौनपुर, जो उत्तर प्रदेश का एक संवेदनशील जिला है, पहले भी सांप्रदायिक तनाव के कारण चर्चा में रहा है। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर बहस छेड़ दी है कि क्या स्वास्थ्य विभाग में संवेदनशीलता प्रशिक्षण की आवश्यकता है? सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि दोषी डॉक्टर पर न केवल विभागीय कार्रवाई हो, बल्कि आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाए।
नौपेड़वा CHC में सफल डिलीवरी
घटना के बाद शमा परवीन के पति अरमान शाह ने अपनी पत्नी को जिला महिला अस्पताल से निकालकर नौपेड़वा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए। वहां एक सरकारी चिकित्सक ने उनकी सामान्य डिलीवरी करवाई और शमा ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। परिवार ने सीएचसी के डॉक्टरों की सराहना की और कहा कि कम से कम यहां इंसानियत दिखी। यह सकारात्मक अंत घटना के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम करता है, लेकिन सवाल बाकी हैं कि जिला अस्पताल में ऐसा क्यों हुआ?
यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को चुनौती देता है। जांच रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। शमा परवीन और उनके परिवार की यह पीड़ा समाज को सोचने पर मजबूर कर रही है कि स्वास्थ्य सेवा में भेदभाव का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। जौनपुर प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होते ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मरीजों का विश्वास बहाल हो सके।

बृहस्पति राज पांडेय यूनिफाइड भारत के एक विचारशील पत्रकार और लेखक हैं, जो खेल, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर निष्पक्ष व प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर उनकी गहरी पकड़ है। वह नीति-निर्माण, युवा उत्थान और खेल जगत पर विशेष ध्यान देते हैं। युवाओं की आवाज़ को मंच देने और सामाजिक बदलाव के लिए बृहस्पति सतत समर्पित हैं।
