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वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के महिला महाविद्यालय (MMV) में शुक्रवार सुबह एक छात्रा की अचानक बिगड़ती तबीयत ने पूरे कैंपस को सन्नाटे में डुबो दिया। एआईएचसी द्वितीय वर्ष की छात्रा प्राची सिंह क्लास की ओर जा रही थीं, जब बॉटनी विभाग के पास वे बेहोश होकर गिर पड़ीं। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम गईं। इस घटना ने न सिर्फ छात्रों में शोक की लहर दौड़ा दी, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर सवाल भी खड़े कर दिए। छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।
घटना का पूरा ब्यौरा: क्लास जाते वक्त क्यों रुकी सांसें?
शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे प्राची सिंह अपने हॉस्टल स्वास्तिकुंज से निकलीं। वे MMV कैंपस में सामान्य दिनचर्या निभा रही थीं। लेकिन बॉटनी विभाग के पास पहुंचते ही उनका चेहरा पीला पड़ गया। अचानक वे गश खाकर जमीन पर लोट गईं। आसपास मौजूद छात्र-छात्राओं ने हड़बड़ा कर चिल्लाना शुरू किया। किसी ने तुरंत हॉस्टल वॉर्डन को फोन किया, तो किसी ने विश्वविद्यालय कंट्रोल रूम को। सूचना मिलते ही कैंपस में हलचल मच गई।
छात्राओं के मुताबिक, प्राची को उठाकर सहेलियां अस्पताल की ओर ले जाने की कोशिश करने लगीं, लेकिन सर सुंदरलाल अस्पताल की मात्र 300 मीटर की दुरी होने के बावजूद एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। आधा घंटा बीत गया, लेकिन वाहन नहीं पहुंचा। आखिरकार, देरी से पहुंची एंबुलेंस ने उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने सीपीआर और अन्य उपाय किए, लेकिन देरी का असर गहरा था। दोपहर तक प्राची इस दुनिया से विदा हो चुकी थीं।
प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने हार्ट अटैक या न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत दिया है, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। प्राची के परिजन, जो गोरखपुर से हैं, शाम तक वाराणसी पहुंच गए। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, पिता रामप्रकाश सिंह ने बताया, “बेटी हमेशा कहती थी, पढ़ाई पूरी करके डॉक्टर बनेगी। आज वो सपना टूट गया।”

छात्रों का आक्रोश, BHU प्रशासन पर भड़का गुस्सा
घटना की खबर फैलते ही MMV कैंपस में सैकड़ों छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए। “एम्बुलेंस कहां थी?”, “स्वास्थ्य सुविधा दो, जान बचाओ!”, ऐसे नारों से हवा गूंज उठी। छात्र नेता उत्कर्ष श्रीवास्तव ने नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि MMV जैसे महिला महाविद्यालय में फर्स्ट एड किट तो दूर, बेसिक मेडिकल स्टाफ भी नहीं है। “अगर समय पर एंबुलेंस आ जाती, तो प्राची बच सकती थी।
यह पहला मामला नहीं है, पिछले साल भी इसी तरह की लापरवाही से छात्रों को नुकसान हुआ।” प्रदर्शनकारियों ने कैंपस गेट पर धरना दिया और कुलपति को ज्ञापन सौंपा। पुलिस ने भीड़ को शांत किया, लेकिन छात्रों का कहना है कि आंदोलन तब तक चलेगा, जब तक मांगें पूरी न हों।

छात्र संगठनों ने स्पष्ट मांगें रखी हैं। सबसे ऊपर है, सभी संकायों और अन्य परिसरों में स्थायी फर्स्ट एड सेंटर खोलना। इनमें 24×7 डॉक्टर, नर्स और जरूरी दवाओं-उपकरणों की व्यवस्था हो। उत्कर्ष श्रीवास्तव ने कहा, “BHU दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय है। 30 हजार से ज्यादा छात्र यहां पढ़ते हैं, लेकिन सिर्फ सर सुंदरलाल अस्पताल पर निर्भरता घातक साबित हो रही।”
इसके अलावा, एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत करने और हर हॉस्टल में डिफिब्रिलेटर जैसी मशीनें लगाने की मांग उठी। छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर सुधार न हुआ, तो राज्यस्तरीय आंदोलन होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड के बाद युवाओं में हार्ट संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं, इसलिए ऐसी सुविधाएं अनिवार्य हैं।

इस दुखद हादसे ने BHU प्रशासन को आत्मचिंतन के लिए मजबूर कर दिया है। कुलपति कार्यालय से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन स्रोतों के मुताबिक शाम को बैठक बुलाई गई थी। प्राची के परिवार को सांत्वना देने के साथ-साथ, विश्वविद्यालय को अब कदम उठाने ही होंगे।
राणा अंशुमान सिंह यूनिफाइड भारत के एक उत्साही पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और प्रभावी ख़बरों के सन्दर्भ में जाने जाना पसंद करते हैं। वह सामाजिक मुद्दों, धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण, महिलाओं के अधिकारों और राजनीति पर गहन शोध करना पसंद करते हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ हिंदी-उर्दू में कविताएँ और ग़ज़लें लिखने के शौकीन राणा भारतीय संस्कृति और सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
