प्रमुख बिंदु-
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ सदर से पूर्व विधायक अब्बास अंसारी (Abbas Ansari) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण (हेट स्पीच) के मामले में मऊ की MP/MLA कोर्ट ने अब्बास को 2 साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी विधायकी 1 जून 2025 को रद्द कर दी गई थी। लेकिन बुधवार, 20 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन ने इस सजा पर रोक लगा दी। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस फैसले से अब्बास की विधायकी बहाल होने की संभावना है। यह मामला उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है।
हेट स्पीच का मामला: क्या हुआ था 2022 में?
यह पूरा विवाद 3 मार्च 2022 का है, जब अब्बास अंसारी मऊ के पहाड़पुर मैदान में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। उस वक्त अब्बास अंसारी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के टिकट पर मऊ सदर सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रहे थे। रैली में उन्होंने कहा, “सपा मुखिया अखिलेश यादव से कहकर आया हूं, सरकार बनने के बाद 6 महीने तक किसी की ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं होगी। जो जहां है, वहीं रहेगा। पहले हिसाब-किताब होगा, फिर ट्रांसफर होगा।” इस बयान को भड़काऊ और अधिकारियों को धमकाने वाला माना गया।
चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से लिया और अब्बास अंसारी के प्रचार पर 24 घंटे की रोक लगा दी। इसके बाद मऊ कोतवाली में तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर गंगाराम बिंद की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। FIR में अब्बास अंसारी, उनके छोटे भाई उमर अंसारी, उनके चुनाव एजेंट मंसूर अंसारी और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ IPC की धाराओं 153A (साम्प्रदायिक वैमनस्य), 506 (धमकी), 171F (चुनाव में अनुचित प्रभाव), 186 (लोक सेवक को बाधित करना), 189 (लोक सेवक को धमकाना) और 120B (षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया।

विधायकी का जाना
31 मई 2025 को मऊ की MP/MLA कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया। जस्टिस डॉ. केपी सिंह ने अब्बास अंसारी को 2 साल की सजा और 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया। उनके चुनाव एजेंट मंसूर अंसारी को 6 महीने की सजा और 2,000 रुपये का जुर्माना हुआ, जबकि उमर अंसारी को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने कहा, “राजनीतिक क्षेत्र में भड़काऊ भाषण की कोई जगह नहीं है, खासकर जब इसका मकसद धर्म के आधार पर अव्यवस्था फैलाना या चुनाव को प्रभावित करना हो।”
‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल्स एक्ट 1951’ की धारा 8(3) के तहत, किसी विधायक को 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर उनकी सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है। इस आधार पर, 1 जून 2025 को यूपी विधानसभा सचिवालय ने अब्बास अंसारी की विधायकी रद्द कर दी और मऊ सदर सीट को रिक्त घोषित किया। रविवार होने के बावजूद सचिवालय खोला गया और चुनाव आयोग को उपचुनाव के लिए प्रस्ताव भेजा गया। हालांकि, उपचुनाव का ऐलान अभी तक नहीं हुआ।

विधायकी बहाल होने की उम्मीद
सजा के बाद अब्बास अंसारी ने पहले मऊ की जिला जज कोर्ट में अपील की, लेकिन 5 जुलाई 2025 को उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उनके वकील उपेंद्र उपाध्याय ने 17 जुलाई 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की। याचिका में दलील दी गई कि अब्बास का बयान आपराधिक नहीं था और इसे अधिकतम आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता था। 30 जुलाई को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद जस्टिस समीर जैन ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
20 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने मऊ कोर्ट की सजा पर रोक लगा दी। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस फैसले से अब्बास की विधायकी बहाल होने का रास्ता साफ हो गया है। अब्बास अब विधानसभा में अपनी सदस्यता बहाल करने के लिए अर्जी दे सकते हैं, जिसे विधानसभा को स्वीकार करना होगा। इस फैसले से मऊ सदर सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव भी टल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी
हाईकोर्ट के फैसले के बाद यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रही है। प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद ने अपर महाधिवक्ता महेश चंद्र चतुर्वेदी से इस मामले में सलाह ली है। चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की सिफारिश की है। सरकार का तर्क है कि अब्बास का बयान भड़काऊ था और इसका सियासी प्रभाव पड़ा। दूसरी ओर, अब्बास के वकील का कहना है कि उनका बयान गलत तरीके से आपराधिक मामले में बदला गया, जबकि यह केवल आचार संहिता का मामला था।
इससे पहले, अब्बास अंसारी के ताऊ अफजाल अंसारी की सांसदी भी गैंगस्टर केस में 4 साल की सजा के बाद रद्द हुई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 13 दिसंबर 2024 को उनकी सजा पर रोक लगाकर उनकी सांसदी बहाल कर दी थी। अब्बास के लिए भी यही रणनीति अपनाई जा सकती है।

क्या NDA का हिस्सा बनेंगे अब्बास ?
2022 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा ने सपा के साथ गठबंधन किया था, जिसके तहत अब्बास ने मऊ सदर सीट से जीत हासिल की थी। लेकिन अब सुभासपा NDA का हिस्सा है और बीजेपी के साथ गठबंधन में है। ऐसे में अगर अब्बास की विधायकी बहाल होती है, तो क्या वे NDA के साथ सत्ता पक्ष में बैठेंगे? यह सवाल सियासी हलकों में चर्चा का विषय है। अब्बास ने कहा, “लोकतंत्र में सबको चुनाव लड़ने की आजादी है, लेकिन जनता सबसे ऊपर है।” उनके इस बयान से साफ है कि वे जनता के समर्थन को प्राथमिकता देंगे।
राणा अंशुमान सिंह यूनिफाइड भारत के एक उत्साही पत्रकार हैं, जो निष्पक्ष और प्रभावी ख़बरों के सन्दर्भ में जाने जाना पसंद करते हैं। वह सामाजिक मुद्दों, धार्मिक पर्यटन, पर्यावरण, महिलाओं के अधिकारों और राजनीति पर गहन शोध करना पसंद करते हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ हिंदी-उर्दू में कविताएँ और ग़ज़लें लिखने के शौकीन राणा भारतीय संस्कृति और सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
